सन् 1988 से हम जरूरतमंद बच्चों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के उत्थान के लिए अनवरत कार्यरत हैं। आध्यात्मिक विकास, सत्गुण विकास और समाजसेवा — यही हमारी पहचान है।
सामाजिक विकास बाल एवं महिला कल्याण समिति की स्थापना सन् 1988 में हुई थी। तब से लेकर आज तक यह संस्था निरंतर जरूरतमंद लोगों की सेवा में समर्पित है।
हमारा ध्येय है — आध्यात्मिक विकास, सत्गुण विकास, महिला कौशल विकास, सामाजिक व आर्थिक उत्थान, ग्रामीण विकास तथा हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रचार-प्रसार।
"सेवा परमो धर्म: — सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।"
समाज के वंचित, शोषित और जरूरतमंद वर्ग — बच्चों, महिलाओं और ग्रामीणों — को शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सामाजिक-आर्थिक उत्थान के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना।
एक ऐसे समाज का निर्माण जहाँ हर बच्चे को शिक्षा, हर महिला को सम्मान, और हर परिवार को जीविका का अधिकार हो। एक न्यायपूर्ण, शिक्षित और स्वस्थ समाज।
समाज के हर वर्ग की जरूरत को समझते हुए हम इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्य करते हैं।
गरीब और वंचित बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करना ताकि वे अपना भविष्य उज्जवल बना सकें।
नियमित रक्तदान शिविरों का आयोजन कर जरूरतमंद मरीजों की जीवन रक्षा में सहयोग।
ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच व दवाइयाँ उपलब्ध कराना।
महिलाओं को कौशल विकास, स्वरोजगार और आर्थिक स्वतंत्रता के लिए प्रशिक्षित करना।
ग्रामीण समुदायों का सर्वांगीण विकास — आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान।
महिलाओं द्वारा तैयार हस्तशिल्प उत्पादों की बिक्री व प्रचार-प्रसार।
स्व० रामचंद्र वर्मा जी एक उत्कृष्ट शिक्षाविद् थे जिन्होंने 44 वर्षों तक एक माध्यमिक विद्यालय में प्राचार्य के रूप में सेवा की। उनका जीवन समर्पण, सेवा और सादगी का प्रतीक था।
उनकी दूरदृष्टि थी कि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और वे समाज को सकारात्मक योगदान दें। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने इस संस्था की नींव रखी और अपना शेष जीवन समाजसेवा को समर्पित कर दिया।
विकास चौधरी जी संस्थापक की विरासत को आगे बढ़ाते हुए संस्था का कुशल नेतृत्व कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में संस्था ने नई ऊंचाइयाँ छुई हैं और हजारों परिवारों का जीवन बदला है।
वे महिला सशक्तिकरण, बाल शिक्षा और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए विशेष रूप से प्रतिबद्ध हैं। उनके नेतृत्व में संस्था ने डिजिटल सेवाओं को भी अपनाया है।
हमारे कार्यक्रमों की जीवंत झलकियाँ
इस संस्था ने मुझे सिलाई का प्रशिक्षण दिया और आज मैं अपने परिवार का पालन-पोषण स्वयं कर सकती हूँ। यह संस्था मेरे लिए वरदान है।
समिति की मदद से मुझे मुफ्त शिक्षा मिली। आज मैं इंजीनियर हूँ और इस संस्था का सदा ऋणी रहूँगा।
यहाँ के रक्तदान शिविरों में भाग लेना एक आत्मिक संतोष देता है। संगठन का समर्पण और कार्यशैली अद्भुत है।
आपका एक कदम किसी के जीवन में उजाला ला सकता है।
हम जल्द ही आपसे संपर्क करेंगे।